सच्चा प्यार क्या है? मुझे सच्चे प्यार के बारे में कैसे पता चलेगा?
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सच्चा प्यार क्या है? मुझे सच्चे प्यार के बारे में कैसे पता चलेगा?

सच्चा प्यार क्या है? मुझे सच्चे प्यार के बारे में कैसे पता चलेगा?

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सच्चा प्यार क्या है? मुझे सच्चे प्यार के बारे में कैसे पता चलेगा?

अगर आप किसी रोमॅंटिक रिश्ते में, शादीशुदा, या कुंवारे हैं तो आपने प्यार को लेकर बहुत सी शिकायतें तो सुनी ही होगी। हम सभी को एक सवाल का जवाब चाहिए – सच्चा प्यार क्या है?

सच्चा प्यार किसे कहते हैं?

“मैं अक्सर ऐसे लड़कों के प्यार में पड़ जाती हूँ जो कहते हैं कि वे मुझसे प्यार करते हैं। लेकिन अंत में वे सिर्फ़ मेरा इस्तेमाल करते हैं और मुझे छोड़ देते हैं।”

“क्या मेरी मंगेतर मुझ से पैसे के लिए शादी कर रही है?”

“मेरा  बॉयफ्रेंड  अक्सर मुझ से बहुत गुस्सा हो जाता है। गुस्से में कई बार वो मुझ पर हाथ भी उठाता है। वो बाद में माफी माँग लेता है। लेकिन क्या ऐसा सच्चे प्यार में होता है?”

“अगर दो लोग एक दूसरे से  सच्चा प्यार करते हैं, तो धर्म शादी से पहले सेक्स की आज़ादी क्यों नहीं देता?”

“पॉर्न देखने में क्या बुराई है? क्या वह मेरी पत्नी के साथ मेरे संबंध को खराब कर सकता है?”

अगर आप किसी भी रोमॅंटिक रिश्ते में कभी रहे हैं, या आप शादीशुदा हैं, या अगर कुंवारे हैं लेकिन आपके दोस्त या तो शादीशुदा हैं या उनका कोई संबंध है – तो आपने ये शिकायतें या प्रश्न ज़रूर सुने होंगे। हमारे देश में तो जैसे प्यार एक ऐसा विषय है जिसके बारे में सबसे ज़्यादा पढ़ा और सुना जाता है। हीर-रांझा, सोनी-महिवाल, जोधा-अकबर जैसे प्रेम कहानियाँ बच्चे बच्चे को याद है।

हिन्दी साहित्य और उर्दू शायरी भी ज़्यादातर प्यार या इश्क विषय से ही भरे पड़े हैं। और हमारे हिन्दी सिनेमा की तो बात ही क्या! शाहरुख ख़ान की लगभग हर फिल्म में एक प्रेम कहानी है। अगर प्यार जैसा विषय इतना अधिक हमारे आस पास कहा और सुना जाता है तो हमारे पास उसके बार में हर जवाब होना चाहिए। लेकिन हक़ीकत कुछ और ही है।

आज भी हम यूटयूब, इंटरनेट पर प्यार के बारे में अपने सवाल खोजते हैं। हम सभी को एक सवाल का जवाब चाहिए – सच्चा प्यार क्या है?

सच्चा प्यार कोई फिल्मी कहानी में नहीं है।

आपको रानी मुखर्जी और विवेक ओबेरॉय की फिल्म साथिया याद होगी। कई मुश्किलों के बाद जब दोनो प्रेमी शादी करके साथ रहने लगते हैं तब उन दोनो को ही एक दूसरे की सच्चाई नज़र आने लगती है। वो एक दूसरे की कई बातों को पसंद या स्वीकार नहीं कर पाते। उनके प्यार को एक कठिन परीक्षा से गुज़रना पड़ता है। अंत में वे एक दूसरे के महत्व को सही मायनों में देख पाते हैं। लेकिन, हर प्रेम कहानी का अंत इस फिल्म की तरह नहीं होता। कई प्रेम कहानियाँ नफ़रत में भी तब्दील हो जाती हैं।

इस लेख में हम कोशिश करेंगे कि आप सच्चे प्यार की परिभाषा को ना केवल समझें बल्कि उसे अपने जीवन में लागू भी कर पायें।

क्या पॉर्न आपके संबंधों को खराब करता है?

बिल्कुल। बहुत से सर्वेक्षणों में पाया गया है कि जो लोग पॉर्न देखते हैं, उनका अपने साथी के प्रति आकर्षण कम हो जाता है। इसलिए क्योंकि पॉर्न सिर्फ़ शारीरिक संबंधों को अवास्तविक रूप से दर्शाता है। इसकी वजह से आपके साथी का ध्यान प्यार से हटकर सिर्फ़ सेक्स तक सीमित रह जाता है। जब ऐसे व्यक्ति का साथी पॉर्न में देखे गये सेक्स की तरह नहीं होता, तो उसका अपने साथी के प्रति आकर्षण कम होने लगता है। ऐसी कई महिलायें है जिन्हे लगता है कि उनके पति का पॉर्न देखना बेवफ़ाई है।

अगर आपका साथी आपसे सच्चा प्यार करता है तो वो आपका सम्मान करेगा और अन्य चीज़ों जैसे पॉर्न में अपना समय बर्बाद नहीं करेगा।

क्या संसार में सच्चा प्यार पाना संभव है?

आप सोच रहें होंगे कि शायद इस तरह का प्यार पाना या करना बहुत ही कठिन है। लेकिन हमें सभी अच्छी चीज़ों के लिए मेहनत करनी पड़ती है। अगर आप शारीरिक गुणों से उपर उठकर यदि अपने मन में झाँकेंगे तो पाएँगे कि जीवन के सबसे प्यारे रिश्तों के पीछे सच्चा प्यार ही है। और हाँ ऐसा प्यार पाना और करना संभव है।

सच्चा प्यार पाने का तरीका है कि सबसे पहले आप अपने मन में झाँकें।

हम पता लगाए कि हमारा दूसरों के प्रति कैसा नज़रिया है। क्या हम बहुत स्वार्थी हैं? क्या हम खुद को दूसरों से बढ़कर देखते हैं? सच्चे प्यार की तलाश हमें खुद से करनी होगी, तभी हम उसे किसी व्यक्ति के साथ महसूस कर सकते हैं।

दोस्तों इंसान होने के नाते जाने अंजाने आपने कभी किसी का दिल दुखाया होगा। आपके सबसे अच्छे दोस्त ने भी कभी तो आपका दिल तोड़ा होगा। इसलिए पूरी तरह से हम एक दूसरे को खुश नहीं कर सकते।

मैने अपने व्यक्तिगत जीवन में यह देखा है कि सिर्फ़ यीशु मसीह ही हैं जिन्होने मुझे कभी निराश नहीं किया। उन्होने मेरी ग़लतियों को माफ़ किया है और मुझ से बिना शर्त के प्यार किया है।

बाइबिल में दिया गया सच्चा प्यार

प्रेम धीराजवंत हैऔर कृपालु हैप्रेम डाह नहीं करताप्रम अपनी बड़ाई नहीं करता और फूलता नहीं।।।वहअपनी भलाई नहीं चाहताझूंझलता नहींबुरा नहीं मानताकुकर्म से आनंदित नहीं होतापरंतु सत्य सेआनंदित होता हैवह सब बातें सह लेता हैसब बातों की प्रतिति करता हैसब बातों की आशा रखता हैसब बातों में धीरज धर्ता है
(1 कुरिंथियों 13:4-7)

इस प्यार का मानक यीशु मसीह ने बनाया। उन्होने हमारे मन परिवर्तन का इंतेज़ार नहीं किया। और जब हम पापी ही थे, उन्होंने हमारे लिए अपनी जान दे दी। ऐसा होता है सच्चा प्यार। क्या आप इस प्यार के बारे में जानना चाहते हैं? यहाँ हमसे बात कीजिए। चलिए हमारे साथ इस नयी मंज़िल पे।

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