घबराहट रोकने के तरीक़े
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घबराहट रोकने के तरीक़े

क्या आप घबराहट से गुज़र रहें हैं? क्या आप घबराहट का कोई उपाए ढूँड रहे हैं और बार बार हार जाते हैं? क्या घबराहट से लड़ा जा सकता है? आइए ढूँडे इसका इलाज!

जीवन

घबराहट रोकने के तरीक़े

क्या आप घबराहट से गुज़र रहें हैं? क्या आप घबराहट का कोई उपाए ढूँड रहे हैं और बार बार हार जाते हैं? क्या घबराहट से लड़ा जा सकता है? आइए ढूँडे इसका इलाज!

घबराहट किन-किन कारणों से होती है?

आज कल की इस तेज़ रफ़्तार वाली दुनिया में स्थिर और शांत रह पाना एक मुश्किल कार्य के समान हो चुका है। और ऐसे में एक अजीब तरह की घबराहट, जो की anxiety के नाम से भी जानी जाती है, हमारे हर दिन का हिस्सा बनने लगती है।

कहीं exams और पढाई की घबराहट, तो कहीं बच्चों की safety की। कहीं peer pressure की घबराहट, तो कहीं सबसे बेहतरीन insta caption डालने की। कहीं लड़की के देर तक बाहर रहने की घबराहट, तो कहीं labour pains ( प्रसव पीडा) की। कहीं interview देने की घबराहट, तो कहीं बॉर्डर (सरहद) पे जुंग छिड़ने की।

यहाँ तक की, फोमो (FOMO) और योलो  (YOLO) के चलते भी लोग घबराते हैं।

पढाई, करियर (career), फ्यूचर प्लान्स (future plans), कमिटमेंट (commitment), शादी, बैंक बैलेंस (bank balance); आज कल कई अलग-अलग वजहों से लोग घबराहट या anxiety से घिरे ही रहते हैं। और कुछ  परिस्थितियों में तो ये बिमारी का कारण भी बन जाती है।

घबराहट के लक्षण

घबराहट एक मानसिक मसला है लेकिन इसके लक्षण कई अलग-अलग प्रकार के हो सकते हैं।

उन में से कुछ प्रमुख लक्षण हैं:

1.बच्चों और बड़ों में एंग्जाइटी की अलग तरह की फीलिंग्स हो सकती हैं।

2.बड़ी उम्र के लोगों में एंग्जाइटी होने पर घबराहट होती है, हल्की सी सांस की रुकावट होती है, हार्ट बीट बढ़ जाती है, लगता है जैसे कुछ खराब होने वाला है।

3.वहीं बच्चों में सांस न आने, चेस्ट या पेट में दर्द की फीलिंग होती है क्योंकि बच्चे घबराहट समझ नहीं पाते तो उनके लिए घबराहट की फीलिंग दर्द बन जाती है।

हमें घबराहट क्यों होती है?

अक्सर हम अपने जीवन में कई अलग तरह के बुरे परिणाम की कल्पना कर लेते हैं और, ऐसी बातों की वजह से हमारे मन में एक डर सा पैदा हो जाता है। घबराहट इन्ही चीज़ों का नतीजा हो सकती है। ऐसे हालात एक बड़े पहाड़ के समान हमारे सामने आकर खड़े हो जाते हैं। इस से लड़ना बहुत कठिन हो जाता है और कई बार तो असंभव सा भी लगता है।

लेकिन, इस से लड़ा जा सकता है!

डर के कारण पैदा हुई घबराहट का उपाय है विश्वास।

आओ, विश्वास की ऐसी ही एक कहानी पढ़ें।

यह बहुत अरसे पुरानी बात है। एक राज्य में गोलियत नामक एक अजेय योद्धा था। वह लगभग नौ फीट ऊँचा था। कोई भी योद्धा उसके खिलाफ जंग में लड़कर कभी न जीत पाया था। एक बार जंग छिड़ने पे गोलियत ने विरोधी राज्य को ललकारा; की, बजाय इसके की सभी सैनिक युद्ध के लिये उसके सामने आएं, वे केवल किसी एक व्यक्ति को चुनें और उसके खिलाफ लड़ने के लिए उसे आगे भेजें। यह सुनकर सभी भयभीत हो गए। तभी एक युवा चरवाहा सामने आया। उसका नाम था दाऊद। उसे रणभूमि में जंग लड़ने का कोई अनुभव नहीं था।

जब उसने अपने राजा से कहा की गोलियत के खिलाफ वो अकेला लड़ेगा तो, राजा ने कहा,“तुम नहीं जा सकते और गोलियत से नहीं लड़ सकते। तुम सैनिक भी नहीं हो! तुम अभी बच्चे हो और गोलियत जब बच्चा था, तभी से युद्धों में लड़ रहा है।”

लेकिन फिर भी उसने यह कहते हुए साहस दिखाया, “मैं आपका सेवक हूँ और मैं अपने पिता की भेड़ों की रखवाली भी करता रहा हूँ। यदि कोई शेर या रीछ आता और झुंड से किसी भेड़ को उठा ले जाता। तो मैं उसका पीछा करता था। मैं उस जंगली जानवर पर आक्रमण करता था और उसके मुँह से भेड़ को बचा लेता था और उससे युद्ध करता था तथा उसे मार डालता था। मैंने एक शेर और एक रीछ को मार डाला है! मैं उस विदेशी गोलियत को वैसे ही मार डालूँगा। गोलियत मरेगा, क्योंकि उसने साक्षात परमेश्वर की सेना का मजाक उड़ाया है। यहोवा ने मुझे शेर और रीछ से बचाया है। यहोवा इस गोलियत से भी मेरी रक्षा करेगा।”

और फिर दाऊद ने अपनी छड़ी अपने हाथों में ली। घाटी से दाऊद ने पाँच चिकने पत्थर चुने। उसने पाँचों पत्थरों को अपने गड़रिये वाले थैले में रखा। उसने अपना गोफन (गुलेल) अपने हाथों में लिया और वह गोलियत से मिलने चल पड़ा। दाऊद ने एक पत्थर अपने थैले से निकाला।

उसने उसे अपने गोफन (गुलेल) पर चढ़ाया और उसे चला दिया। पत्थर गुलेल से उड़ा और उसने गोलियत के माथे पर चोट की। पत्थर उसके सिर में गहरा घुस गया और गोलियत मुँह के बल गिर पड़ा।और इस प्रकार दाऊद ने केवल एक गोफन और एक पत्थर से गोलियत को हरा दिया।

गोलियत को अपनी ताक़त पर विश्वास ही नहीं बल्कि घमंड था, और इसीलिए उसने अपने सामने खड़ी सेना को ललकारा। लेकिन, दाऊद को केवल अपनी ही नहीं, बल्कि, अपने परमेश्वर की ताक़त पर अटल विश्वास था। और इसी वजह से उसने इस चट्टान जैसी चुनौती का सामना किया और जीत हासिल की।

मन की घबराहट का इलाज

दोस्तों, खुद पे विश्वास करना बहुत ज़रूरी है। लेकिन उस से भी ज़्यादा ज़रूरी है, ये मान कर जीना की हम अपनी सामर्थ से शायद हार भी जाएँ, किन्तु परमेश्वर की सामर्थ पे अटल विश्वास रख कर हम कभी नहीं हार सकते। और ऐसा विश्वास हमें हर तरह की घबराहट पे विजय पाना सिखाएगा। आपके दिल के घबराने का इलाज काफी हद तक आपके विश्वास पर निर्भर करता है।

इस जीवन में अनेक मुश्किलों के बीच भी परमेश्वर में स्थिर विश्वास कैसे रखा जा सकता है?

इस बारे में जानने के लिए हमसे बात करें।

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