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डर को काबू करने के 7 तरीके | How To Overcome Fear 7 Tips|Confidence बढ़ाइये

क्या आपको लोगों से डर लगता है? क्या आपका डर आपकी कामयाबी के बीच तो नहीं आ रहा? जानिए डर पर क़ाबू पाने के 7 तरीक़े। अपने डर और फोबिया पर काबू पाना चाहते हैं तो एक बार ज़रूर पढ़ें।

मानसिक स्वास्थ्य

डर को काबू करने के 7 तरीके | How To Overcome Fear 7 Tips|Confidence बढ़ाइये

क्या आपको लोगों से डर लगता है? क्या आपका डर आपकी कामयाबी के बीच तो नहीं आ रहा? जानिए डर पर क़ाबू पाने के 7 तरीक़े। अपने डर और फोबिया पर काबू पाना चाहते हैं तो एक बार ज़रूर पढ़ें।

कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना..

हम सब ने ये मशहूर गाना तो ज़रूर सुना ही होगा। कामयाबी का सपना  तो हम सब  देखते हैं पर वो सिर्फ  एक चिज़ है जो कामयाब होने से रोकती है वह है “डर”। केवल “डर” है जो हमें रोकता है और जिसने डर पर काबू  पाया है उसे सफल जीवन जीने के लिए कोई नहीं रोक सकता। 

लोगों का डर: इसकी पहचान 

डर तो कई प्रकार के हैं और उन में से एक है – लोगों का डर।

लोग क्या कहेंगे? लोग क्या सोचेंगे? और कभी घरवालों का तो कभी समाज का डर। दूसरों से आंखों में आंखें मिला कर बात न कर पाना,  ज्यादा लोगों वाली जगह में जाने से परहेज करना,  बात करने में हिचकिचाना। यदि आप या आपके परिवार का कोई सदस्य “लोगों के डर” की परेशानी से जूझ रहा है तो यह आर्टिकल आपके लिए है।

“जो व्यक्ति अपने डर पे काबू नहीं पा पाता, भविष्य में उसका डर उस पर काबू पा लेता है जिस कारण उसके जीवन में बहुत मुश्किलें पैदा होती हैं।”

डर की शुरुआत: डर क्यों लगता है?

 आप एक डायरी लें और उसमें उन सभी कारणों को लिख ले जिनकी वजह से आपको लोगों से डर लगता है, लोगों के बीच में जाने से डर लगता है। वह सारी बातें जो आपकी हिचकिचाहट का कारण है, उन कारणों को लिख ले और एक एक कर के फिर इन कारणों के ऊपर काम करना शुरू करे। उदाहरण के तौर पर

कारण 1 – मुझे लोगों से इसलिए डर लगता है क्योंकि मैं उनके सामने कॉन्फिडेंट महसूस नहीं कर पाती / पाता।

कारण 2 – मुझे डर इसलिए लगता है क्योंकि एक बार मेरे किसी जान पहचान वाले ने भीड़ मे मेरी बेजत्ति की थी जिसके कारण अब मुझे लोगों के बीच जाने से डर लगता  है।

कारण 3 – बचपन में घटे किसी हादसे के कारण आपके अंदर लोगों का डर पैदा हो गया है। 

डर पर क़ाबू पाने के 7 तरीक़े      

  1.  नकारात्मक विचारों: आमतौर पर लोगों को मिलते समय कॉन्फिडेंड न होने का कारण हमारे खुद के नेगेटिव/ नकरात्मक विचार होते हैं जिन पर हम यकीन कर लेते हैं और फिर हमारा जीवन उन नकारात्मक विचारों के द्वारा नियंत्रित होने लगता है और यह गलत विचारों से घिरे रहना आपके लिए डर का कारण बन जाता है जिसकी वजह से आप कॉन्फिडेंड महसूस नहीं कर पाते। आपको इन गलत विचारों को अपने दिमाग से निकालने का काम करना होगा। 
  2. रोज़ एक नया दिन होता है: याद रखें यह एक दिन का काम नहीं है आपको हर दिन इसके ऊपर कार्य करना होगा और धीरे-धीरे आप बदलाव को देखने लगेंगे। 
  3. Positive थिंकिंग: आप किताबों को पढ़ना शुरू करें जो आपको सही विचार धारणा रखने के लिए प्रेरित करें। 
  4. Bible पढ़िए: अपने विचारों को नया करने के लिए आप बाइबिल का सहारा ले सकते हैं जो आपको सही विचार धारणा रखने के लिए प्रेरित करती है। आपको इससे मदद मिलेगी।व्यवस्थाविवरण 31:6- तू हियाव बाँध और दृढ़ हो, उन से न डर और न भयभीत हो; क्योंकि तेरे संग चलने वाला तेरा परमेश्वर यहोवा है; वह तुझ को धोखा न देगा और न छोड़ेगा।
  5.  भितरी डैमेज से उभरना: कारण नंबर दो और तीन एक घटना से जुड़ा है जिसने आपके भीतर आपको एक सदमा दिया है,  भीतर से आपकी भावनाओं को मानसिक और भावनात्मक रीति से आपको चोट पहुँचाई है,  डैमेज किया है और डैमेज हुई चीज़ हमेशा रिपेयर की जाती है या हिल (चंगा) की जाती है। आपके इस भितरी डैमेज की दवा है (Forgiveness) यानी के माफ कर देना। आप किसी को तभी माफ़ कर सकते हैं जब आपके पास जीवन की आशा है और आप निश्चय ही सच्चाई से परिचित हो जाते हैं कि आपके साथ सब भला होगा। बाइबिल हमें ऐसे ही जीवन की आशा देती है जिसमें कोई डर नहीं है और ऐसा प्यार पाने के बाद दूसरों को माफ़ करना बहुत आसान हो जाता है जो आपके दर्द और डर का कारण होते हैं। बाइबिल बताती है कि सिद्ध प्रेम हमारे अंदर के डर को भगा देता है।  
  6. माफ़ी दीजिए: विज्ञान भी इस सत्य की पुष्टि करता है कि क्षमा करने से इंसान भीतर से चंगा होने लगता है। आप अपने मन में यह विश्वास करके अंगीकार कर सकते हैं के जिन लोगों ने आपको चोट पहुंचाई है आपने उनको क्षमा कर दिया और ऐसा कुछ दिनों के लिए आप लगातार करें ताकि आपके सबकॉन्शियस माइंड को यह ऐहसास हो जाए कि उसे उन भयानक अनुभवों को छोड़ना है और जब आपका सबकॉन्शियस माइंड उसे छोड़ देगा तो आप उस डर से धीरे धीरे निकलने लगेंगे।
  7. आगे बढ़िए: फिर आप अपने दोस्त या परिवार वालों के साथ बाहर जाना शुरू करें। दूसरों से घुलना मिलना शुरू करे, उनसे बात करने की कोशिश करें। कुछ समय के बाद आपको अपने आप मे अंतर दिखने लगेगा और इसके साथ साथ आप अपने परिवार, दोस्त और थेरेपिसट या काउनसलर की मदद भी ले सकते है।

  नयी मंजिल आशा करती है कि इस विषय में वह आपकी मदद कर पाई हो।

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