यीशु मसीह की सचाई के सबूत | एतिहासिक तथ्य | यीशु कौन है? |
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यीशु मसीह की सचाई के सबूत | एतिहासिक तथ्य | यीशु कौन है? |

यीशु मसीह की सचाई के सबूत | एतिहासिक तथ्य | यीशु कौन है? |

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यीशु मसीह की सचाई के सबूत | एतिहासिक तथ्य | यीशु कौन है? |

बाइबिल जो हमें यीशु मसीह के बारे में बताती है, क्या उसमें कोई सच्चाई है? क्या यीशु मसीह के अस्तित्व का कोई ऐतिहासिक प्रमाण है या ये सिर्फ एक पौराणिक कथा है?

क्या यीशु मसीह सिर्फ एक महान व्यक्ति था? क्या वो एक क्रन्तिकारी था? क्या वो ईश्वर था?

टाइम पत्रिका ने यीशु को इतिहास का सबसे प्रभावशाली व्यक्ति बुलाया है। बाइबिल हमें बताती है कि उनका जन्म बेथलेहम में एक कुंवारी लड़की मरियम की कोख से हुआ था। इतिहासकारों और पुरातत्व विशेषज्ञों (archeologist) ने भी माना है की यीशु का जन्म इस पृथ्वी पर हुआ।

इस से पहले की हम ये तथ्य देखें, आईये जानें की इन तथ्यों के क्या प्रमाण मिले हैं। यीशु के पृथ्वी पर जन्म और अस्तित्व के दो तरह के प्रमाण दुनिया के पास हैं। वो हैं – दो महत्वपूर्ण इतिहासकारों के द्वारा की गयी तहकीकात और चश्मदीद गवाह जिन्होंने उनको और उनके द्वारा किये गए कामों को देखा। इसके अलावा उस ज़माने के अवशेष भी मिले हैं लेकिन उनकी सत्यता अभी तक पूरी तरह से साबित नहीं हो पायी है, वो इसलिए क्योंकि 2000 साल पहले के अवशेषों को जांचना आसान नहीं हैं।

इतिहासकारों के लेख

जब यीशु का जनम हुआ जो 0 इसा पूर्व से लेकर 7  इसा पूर्व में किसी समय हुआ था, तब इतिहास को दर्ज करने की कोई बहुत अच्छी प्रक्रिया नहीं थी। उस समय राजा-महाराजा अपने शासन के इतिहास को लिखवाते थे। तब भी कुछ रोमी और यहूदी इतिहासकारों ने काफी बातें दर्ज की, जिनको आगे चलकर दो महत्त्वपूर्ण इतिहासकारों ने सच माना। यहूदी इतिहासकार- फ्लेवियस जोसफ ने यहूदी समाज के इतिहास को लिखते समय यीशु मसीह के उस समय जीवित होने के बारे में साफ़ तौर पर माना है। जोसफ के मरने के २० साल बाद दो सम्मानित इतिहासकारों ने उनके पृथ्वी पर होने की बात को स्वीकारा है। ये दो रोमी इतिहासकार थे, प्लिनी और तासेटस।

चश्मदीद गवाह

पुरातत्व विशेषज्ञ बायरन मेकेन को वो कुंड और वो सारे स्थान मिले हैं जो बाइबिल में यीशु के समय मौजूद थे। जैसे वो कुंड जहाँ यीशु ने एक अंधे व्यक्ति को चंगा करने के लिए भेजा था। मेकेन कहते हैं की सिर्फ इन् अवशेषों से ये साबित नहीं होता की वो सचमुच में इस पृथ्वी पर थे लेकिन रोमी इतिहास में दर्ज बातों में बहुत सारे चश्मदीदों की गवाही भी दर्ज है। मेकेन का मानना है की एक साथ हज़ारों लोग एक व्यक्ति की कल्पना नहीं कर सकते, इतने सारे लोग एक ही बात कह रहे हैं, जिस से ये साबित होता है की यीशु सचमुच दिए गए समय में इस पृथ्वी पर थे।

आईये अब देखें वे तथ्य जो यीशु के असली होने का सबूत हैं

  1. जनम का स्थान सही साबित हुआ है

इतिहासकार ये कहते हैं की यीशु का जनम नासरत नामक एक छोटी से जगह में हुआ था जो बेथलेहम में है। उनका जनम दूसरी और सातवीं इसा पूर्व के बीच के समय में हुआ था।

2. बपतिस्मे की बात सच है

बाइबिल बताती है (मरकुस 1) की यीशु का बपतिस्मा (एक रस्म जिसमें कोई व्यक्ति ये मान लेता है की वह जीवित ईश्वर पर विश्वास करता है) यूहन्ना नामक व्यक्ति के द्वारा हुआ। पुरातत्व विशेषज्ञों ने यह माना है की यूहन्ना नामक एक व्यक्ति था और इस तरह की रस्म बाइबिल में कहे अनुसार हुई क्योंकि उस रस्म के बहुत सारे गवाह थे, साथ ही यह भी सच साबित हुआ की इस रस्म के होने के कुछ ही समय के बाद  यूहन्ना को हेरोद राजा ने मरवा डाला था।

3. उन्हें क्रूस पर चढ़ाया गया था

बाइबिल बताती है कि यीशु को पिंटुस पिलातुस नामक रोमी शासक ने क्रूस पर लटका देने की आज्ञा दी थी। यीशु के क्रूस पर दम तोड़ने के बाद कुछ समय के लिए अँधेरा हो गया था।

बहुत सारे इतिहासकारों ने (विशेषकर सबसे प्रसिद्ध ताकीतुस नामक इतिहासकार) ये बात मानी है की 21 (सी इ) में 2 मिनट और 59 सेकंड का सूर्य ग्रहण हुआ था जो उनकी मृत्यु के समय से मेल खाता है। क्रूस पर चढ़ाया जाना उस समय एक आम प्रथा थी जो रोमी शासन ने लागू की थी, जिसके भी तथ्य पाए गए हैं।

4. वो चंगाई देते थे

बहुत सारे इतिहासकार कहते हैं की यीशु को उस समय चंगा करने वाला या बीमारी ठीक करने वाला समझा जाता था। इतिहास में दर्ज गवाहों में से बहुत सारों ने ये माना था की उन्होंने यीशु को बीमारी ठीक करते हुए और मरे हुए लोगों को ज़िंदा करते हुए देखा था।

5. पिलातुस शासक का घोषणा पत्र

पुरातत्व विशेषज्ञों को रोमी अधिकारी और शासक पिंटियुस पिलातुस का घोषणा पत्र मिला है जिसमें यीशु मसीह को क्रूस पर चढाने की सजा का ब्यौरा है। इसके साथ ही उनकी मृत्यु का समय और पिलातुस की हुकूमत का समय भी मेल खाता है।

बाइबिल यीशु के बारे में क्या कहती है?

बाइबिल में लिखा है की जब यीशु का बपतिस्मा हुआ तब आकाश खुल गए, परमेश्वर की आत्मा एक कबूतर के रूप में यीशु के ऊपर उतरी और आकाश से एक आवाज़ सुनाई दी – ये मेरा प्रिय पुत्र है जिस से में बहुत खुश हूँ [ मत्ती 3: 16-27] इसका मतलब है की यीशु परमेश्वर के पुत्र हैं जिन्हें इस पृथ्वी पर हमारे पापों के लिए भेजा गया।

आप ही ये फैसला करें की यीशु सचमुच थे या नहीं

पुरातत्व विशेषज्ञों और इतिहासकारों ने यह मान लिया है की यीशु सचमुच दुनिया में आये थे। लेकिन उनके बारे में सबसे ज़्यादा जानकारी आपको बाइबिल में मिलेगी। ये वही यीशु हैं जिन्होंने आपके पाप के लिए अपनी जान दी और तीसरे दिन वे फिर जी उठे, इस वजह से उन्होंने मौत पर भी विजय पायी। आपको यीशु मसीह के जी उठने का प्रमाण जेरूसलेम में उनकी ख़ाली क़ब्र से मिलता है और वे जी उठने के बाद लगभग 500 लोगों से भी मिले। अब ये आपके ऊपर है की आप यीशु को मानना चाहते हैं या नहीं।

यदि आप आज यीशु पर विश्वास करें तो वो आज ही आपको अनंत जीवन का वादा दे देते हैं। आज ही अपने पापों को मानकर यीशु पर अपना भरोसा लाईये। अधिक जानकारी के लिए हमें मैसेज करें।आओ हमारे साथ इस नयीमंज़िल पे!

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