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जीवन में मेरा उद्देश्य क्या है?: Purpose of Life

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जीवन में मेरा उद्देश्य क्या है?: Purpose of Life

जीवन का उद्देश्य

 ये एक ऐसा सवाल है जिससे हर कोई कभी-न-कभी अपने जीवन में गुज़रता ज़रूर है। इस सवाल को एक और तरीके से देखा जा सकता है और वह ये है कि- “मैंने इस धरती पर जन्म क्यों लिया?”

अलग-अलग लोग इस सवाल का जवाब अपने-अपने तरीके से देते हैं। अलग-अलग धर्म या पंथ या दर्शन अलग-अलग तरीके से इसे बयां करने की कोशिश करते हैं। कोई कहता है कि अच्छे से पढ़ाई-लिखाई करके एक अच्छी नौकरी पाना और परिवार बसा कर खूब पैसे कमाना हमारा उद्देश्य है तो कोई कहता है कि ये दुनिया और इसका सबकुछ एक मोह-माया है और इसलिए पढ़ाई, नौकरी, परिवार और पैसा, ये सबकुछ बेकार है। कोई कहता है कि हमें अपने जीवन में दूसरे लोगों का भला करना चाहिए, यही हमारा उद्देश्य है तो कोई कहता है कि हमें अपने जीवन को एक निर्धारित नियम के अनुसार चला कर ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। अलग-अलग जगह अलग-अलग बातें कही गई हैं।

लेकिन वास्तव में और असलियत में हमारे जीवन का उद्देश्य है क्या? ये सवाल आज भी हमारे ज़हन में हमारे मन को कहीं-न-कहीं कचोटता रहता है।

जिस तरह एक मोबाइल फ़ोन का उद्देश्य लोगों से बात करने के लिए है न कि गेम खेलने के लिए या गाना सुनने के लिए या फोटो खींचने के लिए भले ही उस फोन में गेम खेलने या गाना सुनने का साफ्टवेयर, या कैमरा हो, ठीक उसी तरह हमारे जीवन का उद्देश्य इस बात में नहीं कि हम क्या कर सकते हैं भले ही हम कुछ भी कर सकते हों। अगर एक मोबाइल फ़ोन को मूल रूप से लोगों से बात करने के लिए बनाया गया है तो हमें भी एक विशेष या स्पेशल उद्देश्य के लिए बनाया गया है। मोबाइल फ़ोन को उसकी कंपनी ने बनाया है और हमें परमेश्वर ने, और वह भी एक विशेष उद्देश्य के साथ।

तो क्या सच में हमारे जीवन का उद्देश्य परमेश्वर में छिपा है?

हाँ…बाइबल, जो कि परमेश्वर का वचन है, उसमें ऐसा ही लिखा है।

बाइबल के अनुसार परमेश्वर को जानना और उसके द्वारा दिए गए नए जीवन को जीना हमारे जीवन का उद्देश्य है। हम परमेश्वर को तभी जान पाएंगे जब हम यीशु मसीह को जानेंगे। और वही हमें नया जीवन देते हैं।

तो क्या हमारे इस जीवन का कोई मतलब नहीं?

नहीं…क्योंकि इस जीवन में हम वो सब कुछ कर रहे हैं जो हम शायद करना चाहते हैं पर जिसके लिए हम बनाए नहीं गए। परमेश्वर हमें अनन्त और भरपूर जीवन और नया जीवन देने की बात करते हैं। चूंकि हम परमेश्वर को नहीं जानते इसलिए हम उनसे और उनके नए जीवन से दूर हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि हम सब सबने अपने जीवन में जाने-अनजाने में गलती की है जिसे बाइबल ‘पाप’ कहती है और हम पवित्र परमेश्वर से दूर हैं। यीशु मसीह ही परमेश्वर तक पहुँचने का एकमात्र रास्ता है जिसे अपनाकर हम परमेश्वर तक पहुँचकर उन्हें जान सकते हैं और एक नया जीवन पा सकते हैं।

अगर आप अपने जीवन और जीवन के उद्देश्य को लेकर अनिश्चित हैं तो आज ही हमसे बात कर सकते हैं। 

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